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Showing posts from July, 2023

गज़ल - याद आता है (2)

मुझे वो खूबसूरत सा, फ़साना याद आता है ।  मिरी ख़ातिर तुम्हारा गुनगुनाना याद आता है ।।  वो मुझसे प्यार का इज़हार, करने के इरादे से ।  मिरे घर का तेरा चक्कर लगाना याद आता है ।।  दिलाई थी कभी चूड़ी जो तुमने लाल रंगों की ।  खुशी से चूड़ियों का, खनखनाना याद आता है ।।  खुले गेसूँ से मेरे खेलना औ उंगलियाँ करना । उन्हीं गेसूँ में तेरा जग भुलाना याद आता है ।।  महकते से ख़तों में इक, खुमारी साथ रहती थी ।  ख़तों को वो क़िताबों में, छुपाना याद आता है ।।  कभी रूठे अगर तुमसे, हमारी दिल्लगी थी वो ।  मनाना वो तेरा, अपना सताना याद आता है ।।  न भूली हूँ न भूलूँगी, वो वादे, वो मुलाकातें ।  मुझे मंज़र जवानी का, सुहाना याद आता है ।। @सरोज गुप्ता

गज़ल - याद आता है (1)

मुझे वो खूबसूरत सा, ज़माना याद आता है ।  सुहाने बचपने का हर, फ़साना याद आता है ।।  वो चढ़ना पीठ पे बाबा के कैसे भूल सकती हूँ ।  समूचे गाँव में मुझको घुमाना याद आता है ।।  पकड़ना तितलियों को, दौड़ना फिर गिर के रो देना ।  दवा ज़ख्मों पे दादी का लगाना याद आता है ।।  किसी दावत से कम ना था,वो माँ के हाथ का खाना ।  उन्हीं के हाथ का खाना ख़जाना याद आता है ।।  पिता का लाड़ जीवन भर , रहेगा साथ में मेरे ।  मिरे सिर पे वो हाथों का फिराना याद आता है ।।  लड़कपन के कई किस्से मेरी यादों में हैं अब भी । शरारत से भरा बचपन, सुहाना याद आता है ।। @सरोज गुप्ता