गज़ल - याद आता है (2)
मुझे वो खूबसूरत सा, फ़साना याद आता है । मिरी ख़ातिर तुम्हारा गुनगुनाना याद आता है ।। वो मुझसे प्यार का इज़हार, करने के इरादे से । मिरे घर का तेरा चक्कर लगाना याद आता है ।। दिलाई थी कभी चूड़ी जो तुमने लाल रंगों की । खुशी से चूड़ियों का, खनखनाना याद आता है ।। खुले गेसूँ से मेरे खेलना औ उंगलियाँ करना । उन्हीं गेसूँ में तेरा जग भुलाना याद आता है ।। महकते से ख़तों में इक, खुमारी साथ रहती थी । ख़तों को वो क़िताबों में, छुपाना याद आता है ।। कभी रूठे अगर तुमसे, हमारी दिल्लगी थी वो । मनाना वो तेरा, अपना सताना याद आता है ।। न भूली हूँ न भूलूँगी, वो वादे, वो मुलाकातें । मुझे मंज़र जवानी का, सुहाना याद आता है ।। @सरोज गुप्ता