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छंद - घनाक्षरी

 शिव विवाह      घनाक्षरी ********* गले मे भुजंग डाले, मृग छाल तन डाले । दुल्हा बने भोले करे,नंदी की सवारी है ।। भभूति गात साजते,जटा में गंग धारते । मात गौरी को ब्याहने,आए त्रिपुरारी है ।। डमरू,त्रिशूल,हाथ,भूत-प्रेत लिए साथ । वर यात्रा ऐसे देख,भीति सखि सारी है ।। मुख पे मुस्कान सोहे, गौरी माँ का मन मोहे । प्रेम को निभाने आए, प्रेम के पुजारी है ।।  @सरोज गुप्ता