गज़ल - याद आता है (1)

मुझे वो खूबसूरत सा, ज़माना याद आता है । 

सुहाने बचपने का हर, फ़साना याद आता है ।। 


वो चढ़ना पीठ पे बाबा के कैसे भूल सकती हूँ । 

समूचे गाँव में मुझको घुमाना याद आता है ।। 


पकड़ना तितलियों को, दौड़ना फिर गिर के रो देना । 

दवा ज़ख्मों पे दादी का लगाना याद आता है ।। 


किसी दावत से कम ना था,वो माँ के हाथ का खाना । 

उन्हीं के हाथ का खाना ख़जाना याद आता है ।। 


पिता का लाड़ जीवन भर , रहेगा साथ में मेरे । 

मिरे सिर पे वो हाथों का फिराना याद आता है ।। 


लड़कपन के कई किस्से मेरी यादों में हैं अब भी ।

शरारत से भरा बचपन, सुहाना याद आता है ।।


@सरोज गुप्ता


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