छंद - घनाक्षरी
शिव विवाह
घनाक्षरी
*********
गले मे भुजंग डाले, मृग छाल तन डाले ।
दुल्हा बने भोले करे,नंदी की सवारी है ।।
भभूति गात साजते,जटा में गंग धारते ।
मात गौरी को ब्याहने,आए त्रिपुरारी है ।।
डमरू,त्रिशूल,हाथ,भूत-प्रेत लिए साथ ।
वर यात्रा ऐसे देख,भीति सखि सारी है ।।
मुख पे मुस्कान सोहे, गौरी माँ का मन मोहे ।
प्रेम को निभाने आए, प्रेम के पुजारी है ।।
@सरोज गुप्ता
अति सुंदर एवं मनमोहक वर्णन 😍💐💐💐💐🙏🏼
ReplyDeleteसादर आभार आपका डियर 🙏🙏💐💐
Delete