छंद - घनाक्षरी

 शिव विवाह


     घनाक्षरी

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गले मे भुजंग डाले, मृग छाल तन डाले ।

दुल्हा बने भोले करे,नंदी की सवारी है ।।


भभूति गात साजते,जटा में गंग धारते ।

मात गौरी को ब्याहने,आए त्रिपुरारी है ।।


डमरू,त्रिशूल,हाथ,भूत-प्रेत लिए साथ ।

वर यात्रा ऐसे देख,भीति सखि सारी है ।।


मुख पे मुस्कान सोहे, गौरी माँ का मन मोहे ।

प्रेम को निभाने आए, प्रेम के पुजारी है ।। 


@सरोज गुप्ता

Comments

  1. अति सुंदर एवं मनमोहक वर्णन 😍💐💐💐💐🙏🏼

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    1. सादर आभार आपका डियर 🙏🙏💐💐

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