कविता - पुत्र

पुत्र के भी वेदना को जानिए,

कष्ट होता है उसे भी मानिए ।

मन में चिंतन भाव लेकर वो रहे

घावों को उसके भी तो पहचानिए ।।


यदि इन्हें हम इक उचित आकार दें,

प्रेम औ ....कर्त्तव्य के संस्कार दें ।

राष्ट्र के आदर्श नायक ये बनेंगे

यदि उचित मूल्यों भरा परिवार दें ।।


उत्तराधिकारी यदी वो पितृ का,

साथ में बोझा लिये दायित्व का ।

निर्वहन करने की खातिर वो चला

छोड़ कर सुख गेह औ अपनत्व का ।।


ग्रीष्म, वर्षा, शीत सह हर वेष में

प्रेषित न कर वो दुख किसी संदेश में ।

बस दिखाता है खुशी हर रोज अपनी

चाहें दुख लाखों सहे परदेश में ।।


भाई है वो बहना का पहरेदार बनकर,

बेटा है वो माॅं बाप का पतवार बनकर ।

जब देश के हित में चला लड़ने लड़ाई

माॅं भारती का इक सिपहसालार बनकर ।।


होते नहीं हैं पुत्र सारे व्याभिचारी,

ये भी होते हैं ..बड़े ही संस्कारी ।

क्यूॅं भला थोपें सदा हम दोष इन पर

इनको गढ़ना है हमारी जिम्मेदारी ।।


@सरोज गुप्ता

Comments

  1. 😍😍😍🥰🥰🥰🥰 बहुत खूबसूरत कविता.... ❤❤

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    1. स्नेहिल आभार बेटा 💐💐😊😊

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  2. Replies
    1. स्नेहिल आभार बेटा 💐💐😊😊

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  3. Bhut sunder kavita mummy 👌👏🤗

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    1. स्नेह और आशीर्वाद बच्चे 😊😊❤❤

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  4. Priye aunty kya khubsurat sandesh diya h apne, bahut sundar ❤️👌🙏

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