गज़ल - नहीं करते
गज़ल - तन्हाई
बहर - 1222 1222 1222 1222
कभी तन्हाइयों में इस कदर आया नहीं करते ।
अगर आ ही गये हो तो पलट जाया नहीं करते ।।
ये उठती सी निगाहों को सनम दीदार हो जाये ।
किसी चिलमन के कोने से कभी साया नहीं करते ।।
फ़लक तक फैले चाहत की समन्दर सी ये गहराई ।
किसी दीवाने अपने ही को अज़माया नहीं करते ।।
जो लम्हें चंद हैं अपने तो आओ ग़ुफ्तग़ू कर लें ।
उमर को ऐसे शरमा कर के यूँ ज़ाया नहीं करते ।।
मुकम्मल ज़िन्दगी कर लें बिता के तेरे बाँहों में ।
अज़ी मसरूफ़ियत के मर्सिये गाया नहीं करते ।।
@सरोज गुप्ता
बेहद खूबसूरत बेहद रूमानी गज़ल 💐💐💐🙏🏼
ReplyDeleteबेहद शुक्रिया आपका डियर 🙏🙏💐💐
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