गज़ल - शोख़ गज़ल कहते हैं

हमारे इश्क को हम ख्वाबे ..अमल कहते हैं ।

शोहरतें किस्मतें सब रब का फजल कहते है ।।

ये अदायें बखूबी......आफरीन हैं जानम ।

जमाले हुस्न को हम शोख गजल कहते हैं ।।


ये जुल्फ हैं या घनेरी.......घटाएं सावन की ।

आंख को मद भरी प्याली या कंवल कहते हैं ।।

जुस्तुजू आपका अब....जीने न देगी हमको ।

हसरते इश्क या नीयत का खलल कहते हैं ।।

ख्वाबों के गुलसितां में जिन्दगी रोशन कर लूँ ।

न बसे खंडहर बसने पे......महल कहते हैं ।।


@सरोज गुप्ता

Comments

  1. न बसे खंडहर, बसने पे महल कहते हैं.... वाह्हहहहहहहहहहहहह

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  2. वाऽऽऽह वाऽऽऽह ख़ूबसूरत ग़ज़ल 👌👌❤️

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  3. बेहद ख़ूबसूरत ग़ज़ल मैम 💐

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  4. बेहद खूबसूरत बेहद रूमानी गज़ल 😍💐💐💐💐💐

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  5. बहुत खूबसूरत

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  6. क्या बात है, जानदार👌👌👌👌

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  7. क्या कमाल ग़ज़ल है, वाहहहहहह

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  8. Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका🙏🙏

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